Taliban Kya hai? जानें तालिबान क्या है और तालिबान की राजधानी कहाँ है?

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Taliban kya hai: इन दिनों तालिबान काफी चर्चे में है. लेकिन कई लोग अब भी जब तालिबान का नाम सुनते हैं तो उनके मन में यह सवाल उठता है की आखिर यह तालिबान क्या है? कई लोगों को अभी भी इस बात की अच्छे से जानकारी नहीं है की तालिबान क्या है? और तालिबान की राजधानी कहाँ है? तालिबान कौन सा देश है? तो इस पोस्ट में हम आपको तालिबान के बारे में विस्तार से बताने वाले हैं. आज इस पोस्ट में आप जानेंगे की तालिबान क्या है (Taliban kya hai) और इसने अफगानिस्तान देश पर क्यों कब्ज़ा किया है?

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आजकल न्यूज़ चैनल पर तालिबान द्वारा अफगानिस्तान पर कब्जे की ढेर सारी न्यूज़ आ रही है. इसी वजह से जो लोग इस तरह की ख़बरों से अनजान हैं, उन्हें यह पता नहीं है की Taliban kya hai? और वे इस सवाल को गूगल में सर्च कर रहे हैं. तो आइये सबसे पहले तालिबान के बारे में जानते हैं.

Taliban kya hai, तालिबान क्या है,
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Taliban kya hai? जानिये तालिबान क्या है पुरे विस्तार से

तालिबान शब्द तालिब से बना है, जो की एक अरबी भाषा का शब्द है. तालिबान का अर्थ है जिज्ञासु या एक छात्र. यदि तालिब को देखा जाय तो यह एकवचन शब्द है और इसका बहुवचन करने पर यह तालिबान बनता है. तालिबान का मतलब है की बहुत सारे छात्र. आपको बता दें की तालिबान अफगानिस्तान का एक संस्था है. जैसा की मैंने बताया की तालिबान का मतलब है स्टूडेंट, तो आपके मन में यह सवाल उठ रहा होगा की ये किस विषय के स्टूडेंट हैं. आपको बता दें की तालिबान हनफी स्कूल ऑफ़ थॉट के स्टूडेंट हैं. दरअसल इस्लाम धर्म में दो वर्ग हैं जिसका नाम है शिया और सुन्नी. शुन्नी के भी चार वर्ग हैं हनफी, मलिकी, शफी और हनबली.

इनमें से पहली विचारधारा हनफी, तालिबान की विचारधारा है. तो अब आपको समझ आ गया होगा की तालिबान शुन्नी हनफी इस्लाम के अनुयायी हैं. आपको बता दें की भारत के सहारनपुर के देवबंद में सुन्नी हनफी इस्लाम की पढाई कराई जाती ही. आपको बता दें की तालिबान के संस्थापक मुल्ला उमर ने भी यहीं से शुन्पनी हनफी इस्ढालाम की पढाई की थी.

तालिबान की स्थापना साल 1994 में Kandahar में 1994 हुई थी. Kandahar अफगानिस्तान देश के दक्षिण दिशा में स्थित है. स्थापना के दो साल बाद साल 1996 में तालिबान ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर कब्ज़ा कर लिया. पहली बार जब इसने काबुल पर कब्ज़ा किया तो इसे 2 साल लगे, लेकिन जब इसने दूसरी बार कब्ज़ा किया तो इसे मात्र 10 दिन लगे. अब आप सोचेंगे की आखिर इतनी जल्दी तालिबान इतने बड़े देश पर कब्ज़ा करने में सफल कैसे हो गया तो आइये इस बात को भी जानते हैं.

Taliban ka Map | तालिबान का नक्सा

तालिबान इतना ताकतवर क्यों है?

तालिबान अफगानिस्तान के पश्तून नश्ल के लड़ाके का नाम है. इस नश्ल के लड़ाकों को दुनिया के सबसे बेस्ट लड़ाकों में गिनती की जाती है. आपको बता दें को अफगानिस्तान की कुल आबादी करीब 3 करोड़ 90 लाख है जिसमें से 1 करोड़ 90 लाख पश्तून हैं. यानी की अफगानिस्तान की आधी आबादी पश्तून हैं. इसी 50% पश्तून आबादी के साथ तालिबान अफ्गानिस्तार के पुरे इलाके को कब्ज़ा करने में सक्षम है. अफगानिस्तान पर करीब 300 सालों तक पश्तूनों की कब्ज़ा रही. अफगानी पश्तूनों के अन्दर हमेशा से ही सत्ता की भूख रही और पश्तूनों में सबसे ज्यादा नाम कमाने वाले अहमद शाह अब्दाली हैं जिन्होंने अफगानिस्तान के बाद पंजाब तक अपनी हुकूमत फैला ली थी. इसके बाद इसने भारत के अन्दर मराठों से पानीपत की तीसरी लड़ाई लड़ी.

आपको बता दें को अफगानिस्तान में 10-12% जमीन ही खेती करने लायक है. इसी वजह से तालिबानियों ने कई बार अन्य देशों पर भी कब्ज़ा जमाया. पंजाब पर अहमद शाह अब्दाली द्वारा कब्ज़ा करने का भी एकमात्र यही वजह था क्योंकि पंजाब में सबसे अधिक खेती करने योग्य जमीन है.

आपको बता दें की अफगानी पश्तूनों के लिए लड़ना बच्चों का खेल है. और इसलिए उन्हें ट्रेनिंग भी दी जाती है. अफगानिस्तान का 40% हिस्सा पूरी तरह पहाड़ी है. और पहाड़ों से नीचे उतरने के बाद अफगानिस्तान में रेतीला मैदान है. यही पहाड़ियाँ तालिबानियों के लिए बेहद सुरक्षित इलाका है. इसी वजह से तालिबान को हराना मुश्किल हो जाता है.

तालिबान को हराना मुश्किल क्यों है?

जब भी कोई बाहरी देश तालिबानियों पर हमला करता है तो तालिबानी पहाड़ियों में ही अपना ठिकाना बना लेते हैं. और दुश्मनों को अफगानिस्तान के बाहर जाने के बाद काबुल की गद्दी पर तालिबानी कब्ज़ा कर लेते हैं. इन पहाड़ियों के वजह से तालिबानी को कोई हरा नहीं सकता. आपको बता दें को इन्हीं पहाड़ियों में मौजूद तालिबानी को ख़त्म करने के लिए 2017 के अप्रैल महीने में अमेरिका ने “Mother of All Bombs” को गिराया था लेकिन Mother of All Bombs भी तालिबान का कुछ नहीं बिगाड़ पाया.

अमेरिका ने अफगानिस्तान को Modern Afghanistan बनाने के लिए बीस सालों के भीतर लगभग Trillions Dollers खर्च किये. लेकिन इसके बाद भी अफगानिस्तान दुबारा बेहद आसानी से तालिबानियों के कब्जे में चला गया. अमेरिका ने अपने इतिहास की सबसे लम्बी लड़ाई लड़ी और आखिरकार उसे हार का सामना करना पड़ा.

तालिबान के जीत की क्या वजह है?

आमतौर पर अन्य देश के लोगों का मानना था की तालिबान को कब्ज़ा करने में 2 से 3 महीने का वक्त लग सकता है लेकिन तालिबान बहुत तेज़ रफ़्तार से काबुल पहुंचे और इस वजह से काबुल के हवाई अड़े पर भगदड़ मच गई. आइये अब जानते हैं की तालिबान के जीत की क्या वजह है. इसके कुछ विशेष कारण हैं जो हम आपको बताने जा रहे हैं.

  • पश्तून कबीलों में काफी अधिक आपसी एकता है. और एक ही ट्राइब के लोग कभी भी आपस में नहीं लड़ते.
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  • अफगानिस्तान के जिस फाॅर्स को अमेरिका ने ट्रेनिंग दी थी उसमें से भी 30% से अधिक लोग पश्तून थे. इन पश्तून अफगान सैनिकों में तालिबान के लिए सहानुभूति थी, इस वजह से अमेरिका ने पश्तूनों के खिलाफ पश्तूनों को खड़ा करने की कोशिश की लेकिन अंततः नाकामयाब रही.
  • तालिबान के पास अमेरिका के द्वारा दिया गया अरबों रुपये के हथियार और Fighters Jet मौजूद है.
  • अफगान सरकार के अन्दर फैले हुए भ्रस्टाचार की वजह से तालिबान अपने साजिश में कामयाब हो जाता है.

तालिबान से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

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तालिबान से जुडी अन्य जानकारी

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अन्तिम शब्द,

आज इस पोस्ट में मैंने बताया की तालिबान क्या है? (Taliban kya hai). आशा करता हूँ की आपको इस पोस्ट को पढ़कर यह समझ आ गया होगा की तालिबान है क्या. तो यदि आपको इस पोस्ट से मदद मिली हो तो इसे अन्य लोगों के साथ भी जरुर शेयर करें. और यदि आप इस पोस्ट से जुड़ा कोई सवाल करना चाहते हैं तो आप हमें कमेंट करके बता सकते हैं.

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