Holi Kyon Manai Jati Hai | होली क्यों मनाई जाती है?

Author: Amresh Mishra | 1 year पहले

Holi Kyon Manai Jati Hai- Holi खुशियों का त्यौहार है और Holi के नाम से ही हमारे चेहरे पर एक अलग ही खुशी और उल्लास की भावना उत्पन्न हो जाती है। हम सभी बचपन से ही पढ़ते आए है कि Holi रंगों का पर्व है। इस त्यौहार को बच्चें से लेकर बूढ़े तक काफी उमंग और खुशी के साथ मनाते है। यही वजह है कि Holi को सभी खुशियों का त्यौहार भी कहते है। Holi ही दुनिया का दूसरा ऐसा पर्व है, जिसको एक साथ हर धर्म के लोग मनाते है। 

हमारे देश में जब भी कोई त्यौहार मनाया जाता है, तब उसके पीछे कोई न कोई पौराणिक और सच्ची कहानी छुपी होती है। ठीक ऐसे ही Holi को मनाने के पीछे भी एक कहानी छुपी है। तो क्या आप भी जानना चाहते हैं कि Holi क्यों मनाई जाती है, यदि हां तो लेख के अंत तक बने रहें। क्योंकि आज के इस पोस्ट में आपको Holi Kyon Manai Jati Hai इससे जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करने वाला हूं। 

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होली क्या है? | What is Holi in Hindi 

होली हिंदू धर्म का सबसे पवित्र त्यौहार में से एक है। इसके साथ ही होली रंगों का त्यौहार माना जाता है। होली हर वर्ष वसंत ऋतु के वक्त वैगन यानी मार्च के महीने में मनाई जाती है। दरअसल, मार्च में पूर्णिमा के दिन Holi सेलिब्रेट किया जाता है। ये एक ऐसा पर्व है, जो सबसे अधिक खुशियां लेकर आता है। चूंकि, ये बसंत का पर्व है और यही वजह है कि इसके आने से ठंडी खत्म हो जाती है। 

वही इस वर्ष की बात की जाएं, तो इस वर्ष 8 मार्च को Holi मनाई जाएगी। हालांकि, हमारे देश के कुछ राज्यों में किसान द्वारा बेहतर फसल पैदा होने की खुशी में भी होली मनाया जाता है। होली का यह पर्व फागुन के लास्ट दिन होलिका दहन की शाम से ही स्टार्ट हो जाती है। वही सुबह से लेकर शाम तक लोग रंगों और अबीरो के साथ होली मनाते है। 

ऐसे में इस दिन हमें हर तरफ ही रंग ही रंग देखने को मिलते है। हमारा प्रकृति और वातावरण काफी खूबसूरत और रंगीन ही रंगीन नजर आती है। इस त्यौहार को प्यार, एकता, सुख, खुशी और बुराई पर अच्छाई की जीत के तौर पर मनाया जाता है। तो चलिए अब बिना समय गंवाए जान लेते है कि आखिर Holi Kyun Manai Jati Hai? 

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होली क्यों मनाई जाती है?| Holi Kyon Manai Jati Hai

कई लोगों को ये जानकारी है कि होली क्यों मनाई जाती है? लेकिन आज भी कई बच्चे और कई लोग ऐसे है, जिनको होली क्यों मनाई जाती है इसके बारे में अच्छे से नहीं पता हैं। तो आपको बता दूं कि इससे जुड़ी कई पौराणिक कथाएं सुनने को मिलती है और इन्हीं में से एक सबसे प्रसिद्ध प्रह्लाद और उनकी भक्ति का है। माना जाता है कि काफी सालों पहले हिरणकश्यप नामक एक बहुत शक्तिशाली अशुर हुआ करता था। 

दरअसल, इस असुर को ब्रम्हा देव से यह वरदान मिला था कि इसे कोई भी इंसान या जानवर नहीं मार सकता है। ना ही इस असुर को घर से बाहर या घर के अंदर, ना ही दिन और ना ही रात में, ना ही किसी अस्त या शस्त से और ना ही धरती या आकाश में मार सकता है। वही ब्रम्हा जी के इस वरदान को प्राप्त कर इस असुर को घमंड हो गया था। 

वे खुद को ही ईश्वर समझ बैठा था। वे अपने क्षेत्र के सभी नागरिकों पर खूब अत्याचार करता था और हर किसी को भगवान विष्णु की पूजा करने से रोका करता था और सबसे कहता था की मेरी पूजा करों। दरअसल, भगवान विष्णु जी ने इस असुर के छोटे भाई का विनाश किया था बस इसी चीज का बदला ये असुर लेना चाहता था। 

वही हिरणकश्यप का एक प्रह्लाद नाम का बेटा था। दरअसल, प्रह्लाद भले ही एक असुर का पुत्र था लेकिन वे सबसे खिलाफ होकर भगवान विष्णु जी का पूजा करता था। हालांकि, क्षेत्र के सभी नागरिक डर और मजबूरी की वजह से असुर को अपना भगवान कहते थे लेकिन प्रह्लाद ने कभी अपने पिता को भगवान नहीं समझा। 

हालांकि, हिरणकश्यप ने अपने पुत्र को कई बार भगवान विष्णु की पूजा करने से मना किया। लेकिन, प्रह्लाद ने कभी अपने पिता की बात नहीं मानी। इसी गुस्से की ज्वाला में जलते हुए हिरणकश्यप ने अपने ही बेटे को मारने का विचार कर लिया। 

होलिका दहन की कथा 

दरअसल, हिरणकश्यप ने अपने ही बेटे को मारने के लिए एक योजना बनाई और अपने बहन होलिका की मदद मांगी। आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि होलिका को भगवान शिव ने एक वरदान प्रदान किया था और वो यह था कि जब तक होलिका के शरीर पर वस्त्र रहेगा तब तक उसे कोई भी जला ही सकता हैं। 

वही हिरणकश्यप ने एक योजना बनाई और अपनी बहन होलिका को प्रह्लाद को अपने गोद में बैठा कर अग्नि में बैठने का आदेश दे डाला। चूंकि, हिरणकश्यप को पता था की होलिका तो वरदान के कारण जल नहीं सकती लेकिन उसका बेटा प्रह्लाद जरूर जल कर खत्म हो जाएगा। जिससे वो हर जगह यह खौफ बनाना चाहता था कि जो भी उसकी बात नहीं मानेगा, उसका अंजाम इसके पुत्र जैसा ही होगा। 

वही जब होलिका अपनी गोद में प्रह्लाद को लेकर बैठी तब प्रह्लाद भगवान विष्णु की जाप में लीन थे। विष्णु जी की जो भी भक्ति सच्चे मन से करता है, उसके साथ भला कुछ बुरा कैसे हो सकता है। इसलिए अपनी भक्त की रक्षा करने के लिए भगवान विष्णु जी ने भी एक योजना बनाई और बीच में ही ऐसा तूफान आया कि होलिका का वस्त्र उड़ अगर और वो आग में जल कर भस्म हो जाती है। 

वही दूसरी तरह प्रह्लाद को एक खरोच तक नहीं आती है। तब से लेकर अब तक बुराई पर अच्छाई की जीत पर हम सब प्रह्लाद की सच्ची भक्ति को याद करके होली मनाते है। वही होली से एक दिन पहले शाम में हर वर्ष होलिका दहन किया जाता हैं। 

FAQ’S Related To Holi Kyon Manai Jati Hai 

Q1. होली किसको याद करके मनाई जाती है? 

होली भगवान विष्णु के भक्त प्रह्लाद को याद करके मनाई जाती है। 

Q2. इस वर्ष होली कब मनाई जाएगी? 

इस वर्ष 8 मार्च को होली मनाई जाएगी। 

Q3. होली किसका प्रतीक है? 

होली बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। 

निष्कर्ष (Holi Kyon Manai Jati Hai) 

आशा करता हूं कि आपको हमारा Holi Kyon Manai Jati Hai का यह पोस्ट पसंद आया होगा। क्योंकि आज के लेख में मैंने आप सभी को होली क्यों मनाई जाती है से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान किया है। इसके साथ ही अगर आपको हमारे आज के इस Holi Kyon Manai Jati Hai के पोस्ट को पढ़कर कोई भी सवाल पूछना हो, तो आप कमेंट करके पूछ सकते हैं। साथ ही पोस्ट पसंद आए, तो शेयर करना ना भूलें। 

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Author: Amresh Mishra

I am Amresh Mishra, owner of My Technical Hindi Website. I am a B.Sc graduate degree holder and 21yrs old young entrepreneur from the City of Patna. By profession, I'm a web designer, computer teacher, google webmaster and SEO optimizer. I have deep knowledge of Google AdSense and I am interested in Blogging.

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