DNS Full Form kya hai | DNS क्या है और यह कैसे काम करता है?

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DNS Full Form: क्या आप जानते हैं की DNS क्या है? DNS का फुल फॉर्म क्या होता है? DNS कैसे काम करता है? “DNS” एक ऐसी System है जो वेबसाइट के यूआरएल को IP Address में परिवर्तित करती है। डीएनएस के बिना, जब आप किसी वेबसाइट पर जायेंगे तो आपको पूरा IP Address टाइप करना होगा।

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आज इस पोस्ट में मैं विस्तार से DNS के बारे में बताने वाला हूं। यदि आप भी जानना चाहते हैं की DNS kya hai, DNS ka full form kya hai? तो इस पोस्ट को पूरा पढ़ें।

आम तौर पर, इंटरनेट पर किसी वेबसाइट पर जाने के लिए, हम उसके URL का इस्तेमाल करते हैं। यदि हम यूआरएल के बजाय किसी वेबसाइट का IP Address याद करने लग जाएं तो यह काम काफी मुश्किल भरा होगा। क्योंकि, इसका मतलब है, आपके पास विज़िट की गई वेबसाइटों के आईपी एड्रेस की पूरी सूची होनी चाहिए और उन्हें मैन्युअल रूप से दर्ज करना होगा। इसीलिए DNS का इस्तेमाल किया गया और यह काम को आसान बनाया गया। यहां हम विस्तार से बताने वाले हैं की DNS कैसे काम करता है? इससे पहले आइए जानते हैं की DNS का Full Form क्या है?

DNS का Full Form क्या है
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DNS का पूरा नाम (DNS full form in Hindi)

DNS का फुल फॉर्म ‘Domain Name System’ है। कभी कभी इसे Domain Name server अथवा Domain Name Service के रूप में संदर्भित किया जाता है. DNS का आविष्कार सन 1983 में Paul Mockapetris ने किया था।

D = Domain
N = Name
S = System

ऊपर आपने देखा की DNS ka Full Form kya hai? आइये अब जानते हैं की DNS क्या है और यह कैसे काम करता है?

DNS क्या है? (What is DNS in Hindi?)

DNS एक प्रकार का डेटाबेस है जहां दुनिया भर में फैले प्रत्येक IP Address के अनुसार सभी डोमेन नामों की सूची संग्रहीत की जाती है।

आमतौर पर आईपी एड्रेस को याद रखना मुश्किल होता है। इसलिए जब आप अपने ब्राउज़र के सर्च बार में एक डोमेन नाम टाइप करते हैं और एंटर दबाते हैं, तो आपके पास एक DNS सर्वर इस डोमेन नाम को संबंधित आईपी पते में बदल देता है और इसके साथ आपके संचार की व्यवस्था करता है।

इस कार्य में प्रत्येक नेटवर्किंग ऑपरेटिंग सिस्टम एक प्रकार के सॉफ्टवेयर का उपयोग करता है जिसे DNS रिजॉल्वर कहा जाता है, जो आईपी एड्रेस को खोजने में मदद करता है।

जिस प्रकार हमारे मोबाइल में उपस्थित Phonebook हमें सभी Call की जानकारी देता है ठीक उसी प्रकार Domain Name System भी Internet का Phoneook होता है। जैसे :- Google.com के जरिए लोग online information प्राप्त करते हैं, उसी तरह Web Browser IP address के माध्यम से एक-दूसरे को समझते हैं।

Domain Name System (DNS), Domain name को IP address में translate करता है, जिसके कारण ही Browser इंटरनेट में मौजूद Resources को Load कर पाता है।

DNS का इतिहास क्या है? (What is the history of DNS in Hindi?)

अभी तक पूरे विश्व में लगभग 2 Billion Website मौजूद हैं तथा इनकी संख्या बढ़ती ही जा रही है। Internet इतना व्यापक हो चुका है कि हम जितनी देर में एक वेबसाइट को खोलते हैं लगभग उतनी देर में एक नई  Website बनकर तैयार हो जाती है।

हम सभी के लिए अलग-अलग तरह की और अपनी पसंदीदा वेबसाइट के आईपी ऐड्रेसेस (IP address) को याद रख पाना मुश्किल होता है। इसीलिए इस समस्या का समाधान करने के लिए Paul Mockapetris ने सन् 1983 में इरविन के California विश्वविद्यालय में Domain Name System का अविष्कार किया था। वर्ष 1984 में यूसी बर्कले के 4 छात्रों ने पहला यूनिक्स name server implementation लिखा, जिसे Berkeley Internet Name Domain (BIND) सर्वर कहा जाता हैं। Unix system अभी भी DNS SERVER में व्यापक रूप से उपयोग किया जाने वाला Server है। 

DNS server system बहुत ही व्यापक रूप से काम कर रहा है और अभी इसकी डिमांड इंटरनेट पर बहुत ज्यादा है। साथ ही साथ यह बेहतरीन सुविधाएं भी प्रदान करता है। काफी लोगों ने इस पर अनेक प्रकार के एक्सपेरिमेंट किए हैं जिसमें से यूनिक्स सर्वर सिस्टम सबसे बेहतरीन काम कर रहा है और इसे काफी डिवेलप भी किया गया है, ताकि इसमें काम करने वाले किसी भी ग्राहक को परेशानियों का सामना न करना पड़े।

टॉप लेवल डोमेन क्या होते हैं? (What are the Top level Domain in Hindi?)

Top level Domain इंटरनेट की डोमेन नाम रखने की प्रणाली है जिसमें सबसे ऊंचे स्तर के domain name को Top Level Domain कहा जाता हैं, जो सभी वेबसाइट के अंत में लगता है और उसकी सहायता से हम Website के Original page तक पहुंच सकते हैं। इसके अंतर्गत .com , .in , .org , .edu इत्यादि आते हैं।

Internet Corporation Assigned Name and Numbers ( ICANN ) के आंकड़ों के अनुसार Top Level Domain की संख्या लगभग 1505 है।

डोमेन नेम क्या हैं? (What is Domain Name in Hindi ?)

Domain Name एक प्रकार का name address होता है। इसका उपयोग हम Website के original page में पहुंचने के लिए करते हैं। Domain Name की सहायता से हमें आईपी ऐड्रेसे के नंबरों को याद नहीं करना पड़ता है।

सब-डोमेन क्या है (What is Sub-Domain in Hindi?)

जब भी हम Website बनाते हैं तो उसके लिए हमें सबसे पहले Domain Name खरीदना होता है, जो website के आखिर में लगता है। इसके बाद हम Sub-Domain को चुनकर शुरुआत में लगा देते है। इसमें ask.wikipedia.com & Hindi.mysterious facts.com इत्यादि शामिल हैं।

एफक्यूडीएन क्या होता है (What is FQDN in Hindi?)

FQDN Domain full form FULLY QUALIFIED DOMAIN NAME होता हैं। इसमें एक Host and Top level Domain मौजूद होता है। इसकी सहायता से सभी ग्राहक के लिए वेबपेज और Web browser के सटीक स्थान को निश्चित करने के लिए उपयोग में लाया जाता है।

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डीएनएस अनुक्रम क्या है? (What is DNS Hierarchical in Hindi?)

Domain Name Server इंटरनेट में मौजूद domain name का अनुक्रम (hierarchical) और विकेंद्रीकरण नामकरण प्रणाली है। इसका अर्थ यह है की ये इंटरनेट में उपलब्ध domain name को व्यवस्थित कर tree structure में उपलब्ध कराता है।

डीएनएस सर्वर के प्रकार ( Types of DNS Server in Hindi )

DNS Server तीन प्रकार के होते हैं जो निम्नलिखित हैं –

  1. DNS Resolver.
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  3. DNS Root Server.
  4. DNS Authoritative Server.

DNS Records क्या होता है (What is DNS records in Hindi?)

DOMAIN NAME SYSTEM अपने पास सारे डीएनएस सर्वर के रिकॉर्ड्स और सभी IP addresses  का लेखा जोखा बहुत ही अच्छे ढंग से व्यवस्थित करके अपने पास रखता है। इसी को हम DNS records कहते हैं।

डीएनएस रिकॉर्ड कितने प्रकार के होते है? (How many types of DNS Records In Hindi?)

DNS सिस्टम में यूजर द्वारा अनुरोधित जानकारी को DNS रिकॉर्ड कहा जाता है। DNS सिस्टम में कई प्रकार की जानकारी का अनुरोध किया जा सकता है। इसलिए कई तरह के DNS Records होते हैं। यहां कुछ ऐसे DNS Records दिए गए हैं जो सबसे आम हैं।

A रिकॉर्ड या Address रिकॉर्ड ─ यह Hostname, Time to live (TTL), और IPv4 Address के बारे में जानकारी संग्रहीत करता है।

AAA Record – यह होस्टनाम की जानकारी और उससे जुड़े IPv6 पते को स्टोर करता है।

MX Record ─ यह विशेष रूप से एक डोमेन ई-मेल का आदान प्रदान के लिए इस्तेमाल किया SMTP सर्वर रिकॉर्ड करता है।

CNAME Record – इसका उपयोग किसी डोमेन या Subdomain को IP Address पर Redirect करने के लिए किया जाता है। इस एक फ़ंक्शन के माध्यम से, आपको अपने DNS Records को अपडेट करने की आवश्यकता नहीं है।

NS Record ─ यह वांछित आधिकारिक नाम सर्वर पर Sub Domain को संदर्भित करता है। यह रिकॉर्ड उपयोगी है यदि आपकी वेब होस्टिंग पर आपका SubDomain आपके डोमेन से अलग है।

PTR Record – यह DNS रिज़ॉल्वर को IP पते के बारे में जानकारी प्रदान करने और Hostname (रिवर्स DNS लुकअप) प्रदर्शित करने की अनुमति देता है।

CERT Record – यह Encryption certificate या Security certificate संग्रहीत करता है।

SRV Record – यह Communication places से संबंधित जानकारी संग्रहीत करता है, जैसे कि Priority, Name, Port, Point और TTL.

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TXT Record – यह डेटा को वहन और प्रसारित करता है जिसे केवल मशीनों द्वारा पढ़ा जा सकता है।

SOA Record- यह वह खंड जो DNS ज़ोन दस्तावेज़ की शुरुआत में दिखाई देता है। वही खंड आधिकारिक name server के साथ-साथ डोमेन पर पूरी जानकारी को भी संदर्भित करता है।

कम प्रयोग किए जाने वाले DNS Records :

• AFSDB ( AFS Data Base Location).

• ATMA (Asynchronous Transfer Mode Address).

• CAA (Certification Authority Authorization).

• DNAME (Non-terminal DNS Name Redirection).

• LOC (Location Information).

DNS कैसे काम करता हैं? ( How DNS works in Hindi?)

जैसा की मैंने पहले बताया, DNS इन्टरनेट का एक केंद्रीय हिस्सा है जो डोमेन नाम को IP Address में बदल देता है. आइये Step By Step समझते हैं की DNS कैसे काम करता है.

Step 1: Website Information :- हमें जिस वेबसाइट में जाना है उसके डोमेन नेम को computer में सर्च करते ही Resolve process start होकर DNS query generate होती हैं।

Step 2: Local DNS cache to query resolve :- सबसे पहले हमारा computer domain name की सहायता से Associate IP address को ढूंढता है और मिलने पर कंप्यूटर हमें browser पर website कि information दिखाने लगता है।

Step 3: DNS server से संपर्क साधना :- अगर computer को website कि information नहीं मिलती हैं तो new query generate कर अपने system में मौजूद DNS server से connect हो जाता है।

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Step 4: Send query to Recursive DNS server :-  आजकल इंटरनेट पर ढेर सारे DNS server मौजूद है। बहुत से लोग अपना सर्वर इस्तेमाल करते हैं तथा Recursive DNS server केवल Top level Domain server रखते है। 

जब कंप्यूटर DNS query को recursive DNS server को भेजता है तो कंप्यूटर DNS cache में डोमेन नेम खोजता है अगर मिल जाती है तो problem resolve हो जाती है।

Step 5: Send query to authoritative DNS server :- Authoritative DNS server प्रत्येक DNS records अपने पास ही रखता है और सभी server इसी सर्वर को प्रोब्लम भेजते है। Authoritative sever सभी DNS query को resolve कर देता है।

FAQs Related to DNS (Domain Name System)

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अंतिम शब्द,

आज इस पोस्ट में मैने बताया कि DNS (Domain Name System) क्या है और DNS कैसे काम करता है? DNS ka full form kya hai? आशा करता हूं आपके लिए यह पोस्ट हेल्पफुल होगा। यदि आपको यह पोस्ट (DNS Full Form in Hindi) पसंद आया हो तो इसे अन्य लोगों के साथ भी अवश्य शेयर करें। साथ ही अगर आपके पास कोई सवाल हो तो हमें कमेंट करके बताएं।

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